गौरेला–पेंड्रा–मरवाही: शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर , समाचार के बाद जागा प्रशासन, 2 माह तक शिक्षक विहीन रहा विद्यालय, अधिकारियों को भनक तक नहीं !

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही: शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर , समाचार के बाद जागा प्रशासन, 2 माह तक शिक्षक विहीन रहा विद्यालय, अधिकारियों को भनक तक नहीं !
गौरेला–पेंड्रा–मरवाही। जिला शिक्षा विभाग की प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। मरवाही विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय चिल्हनटोला में पिछले दो माह से एक भी शिक्षक उपस्थित नहीं था, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इसकी कोई जानकारी तक नहीं थी।ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को विद्यालय की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अड़ियल रवैये और मनमानी के चलते किसी ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान नहीं लिया। दो महीने तक बच्चे बिना पढ़ाई के स्कूल आते रहे, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं था।
समाचार प्रकाशन के बाद जागा विभाग?
स्थानीय मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद जैसे विभाग की नींद टूटी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 12 नवंबर 2025 को हेमंत कुमार, शिक्षक—शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय टूरीझिरिया को चिल्हनटोला विद्यालय संचालन हेतु तत्काल प्रभाव से आदेश जारी किया गया।
इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि—जब स्कूल 2 माह तक शिक्षक विहीन रहा, “तब DEO रजनीश तिवारी” को इसकी जानकारी क्यों नहीं ? क्या विभाग के पास निरीक्षण तंत्र सिर्फ कागजों पर चल रहा है ?
“बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला”
ग्राम पंचायत गुल्लीडाड़ के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन विभाग के अधिकारी “कोई डर नहीं, मनमानी रवैया से मस्त” होकर चलते रहे।ग्रामीणों ने यह भी कहा कि “जब प्रशासन रोज स्कूल निरीक्षण की बातें करता है, तो दो महीने तक स्कूल शिक्षक विहीन कैसे रहा? क्या यह अनदेखी नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही नहीं है?”
2 माह की पढ़ाई का नुकसान — कौन करेगा भरपाई?
बच्चों की पढ़ाई दो माह तक पूरी तरह प्रभावित रही। अभिभावकों को चिंता सता रही है कि “अब दो महीने की पढ़ाई की भरपाई कैसे होगी?”विशेषकर दूरस्थ आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों की शिक्षा पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है।
शिक्षा मंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने राज्य के शिक्षा मंत्री से मांग की है कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो और बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ बंद हो।





